The Himalaya Collective

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हिमालय कलेक्टिव क्या है?

हिमालय कलेक्टिव क्या है? यह हिमालय के अलग-अलग राज्यों (जैसे की उत्तराखंड, हिमाचल एवं जम्मू और कश्मीर) में रहने और काम करने वाले विभिन्न लोग और संगठनों को एकीकृत करके एक खुले उद्भव मंच की अवधारणा या सोच है । 

पर्वतीय क्षेत्र व शृंखलाएँ बदल रही हैं, फिर भी ये क्षेत्र काम करने का उत्कृष्ट ख़ूबसूरत पारितंत्रा है। जो कोई भी इस क्षेत्र के सामाजिक विकास या पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे हों, उनके लिए पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और भूगोलिक स्तिथि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आपस में भिड़ते रहते हैं । 

पहाड़ और पहाड़ी समुदायों को मजबूत बनाने का काम कोई एक संगठन या व्यक्ति नहीं कर सकता  इस मुद्दे पर मिलकर ही, अपने-अपने विचारों का योगदान करते हुए, एक दूसरे के साथ अंतदृष्टि व् संसाधनों का आदान-प्रदान करते हुए हम हिमालय में विकास को समावेशी, टिकाऊ और संदर्भ-विशिष्ट बना सकते हैं । 

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो आप पहले से ही हिमालय कलेक्टिव का हिस्सा हैं, और यहां पर आपका स्वागत है!

कोई भी जानकारी, उपाय, साधन, अफसरों के समाचार या सहयोग के सुझाव को इस वेबसाइट पर शेयर करने के लिए इ-मेल पर संपर्क करें:

thehimalayacollective@gmail.com

हरेला सोसायटी ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में विकसित किया पर्पल क्यूब

कोरोनावायरस महामारी अब तक 185 देशों में एक लाख से अधिक लोगों की जान और बीस लाख से अधिक लोगों को संक्रमित किया हैं। इससे व्यक्तिगत सुरक्षात्मक उपकरणों (पीपीई) जैसे मुखौटे, स्वास्थ्य किट, और चिकित्सा उपकरणों जैसे वेंटिलेटर की कमी हुई है। इन चुनौतियों के बावजूद, पिथौरागढ़ की हरेला सोसायटी …

पवलगढ़ में सामुदाय आधारित पर्यटन: एक आशा की किरण

हमेशा से ही पर्यटन प्रोत्साहित क्षेत्र रहा है। जिसने राजस्व लुप्त होती प्रजातियों का संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को पुनः जीवित किया है। केवल आज के समय में ही “अधिक पर्यटन” के नकारात्मक प्रभाव सामने आए हैं। जैसे कि बहुत ज्यादा मात्रा में पर्यटकों का एक ही स्थान पर जाना। …

भारत की ग्रेटा थुनबर्ग और जलवायु परिवर्तन के लिए उनकी लड़ाई

आपने ग्रेटा थुनबर्ग के बारे में सुना होगा,स्वीडेन की एक युवा लड़की जो जलवायु परिवर्तन के बारे में विश्व स्तर पर बात करती है। ग्रेटा सरकारों और विश्व नेताओं को कार्य करने की जरुरत के बारे में भी बात करती है और वो अकेली नहीं है। भारत में भी जलवायु …

पश्चिमी हिमालय की जैवविविधता के बारे में सीखने का मौक़ा, कश्मीर में!

क्या आप प्रकृति, पर्यावरण या सामाजिक विकास पर काम करते हैं? ATREE और कश्मीर विश्वविद्यालय आपके लिए लाते हैं एक निशुल्क कार्यशाला, उत्तर पश्चिमी हिमालय में जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन पर।

रूपरेखा: तितली ट्रस्ट

2009 में स्थापित, तितली ट्रस्ट संरक्षण शिक्षा, कार्रवाई और अनुसंधान पर काम करती है।देवलसारी और पवलगढ़ क्षेत्र में समर्थन के माध्यम से स्थानीय पारिस्थितिकी से जुड़ी स्थायी आजीविका का समर्थन करने का प्रयास करती है।

कहानी पलायन की : उत्तराखंड

पिछले एक दशक में, उत्तराखंड बड़े पैमाने पर पलायन को दर्शा रहा हैं और 950 से अधिक गाँव पूरी तरह से खत्म हो गए हैं। 3500 से अधिक गाँवों में 50 से कम की आबादी हैं।

GOONJ Rural Fellowship for Youth

हिमालय के युवाओं का आह्वान:   क्या आप भारत के ग्रामीण इलाक़ों में काम करने के इच्छुक हैं? क्या आपको सामाजिक विकास, शिक्षा, आजीविका, महिलाओं के स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे चुनौतीपूर्ण विषयों में काम करने की रुचि है?   अगर हाँ, तो देश भर में काम कर रही गूंज की टीमों के साथ जमीनी स्तर …

ख़ुद की संस्था या संगठन कैसे खोल सकते हैं?

हो सकता है कि आप चाहते हों कि आपका NGO बाल अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पशु कल्याण, लिंग या शरणार्थी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करे। बस एक ऐसा मुद्दा चुनें, जिसके बारे में आप भावुक हैं और गहराई से महसूस करते हैं, ताकि यह कारण आपको सबसे अधिक समय के प्रयास में भी आगे बढ़ा सके।

सूचनात्मक संसाधन

केस अध्ययन

पवनगढ़ में सामुदायिक-आधारित पर्यटन: विकल्प संगम

SHEN की कहानी: लाहौल और स्पीति में मानव-वन्यजीव संरक्षण से संबंधित दृष्टिकोण बदलना: विकल्प संगम

हिमाचल के जंगलों को वापस लाना: विकल्प संगम

उत्तराखंड का बीज बचाओ आंदोलन: विकल्प संगम: विकल्प संगम

जंगल की आग से लड़ने के लिए वर्षा जल संचयन: विकल्प संगम

हिमालय की पहाड़ियों को हरा भरा करना: विकल्प संगम

संकलन / रिपोर्ट

पस्चिम हिमालय क्षेत्र के लिए एक जन घोषणा पत्र: अंग्रेज़ी

पसचिम हिमालय क्षेत्र के लिए एक जन घोषणा पत्र: हिंदी

रूपरेखा

तितली ट्रस्ट (उत्तराखंड)

स्नो लेपर्ड कंसेर्वंसी (जम्मू & कश्मीर, लदाख)

हरेला सोसाइटी (उत्तराखंड)